रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्या है और इसे कैसे बढ़ाएं ?(What is immunity and how to increase immunity?)

रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्या है, इसे कैसे बढ़ाए? (What is Immunity?   in Hindi)

    
इम्युनिटी को हिंदी में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कहा जाता हैं , रोग-प्रतिरोधक क्षमता सभी लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण चीज़ है।
डॉक्टर भी लोगों को इसे बनाए रखने या फिर बढ़ाने की सलाह देते हैं, लेकिन लोगों के मन में यह सवाल आता है, कि रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्या है ? और इसे बढ़ा सकते हैं या नही , तो  जवाब है हाँ ।


Immunity कमजोर  होने  के वजह  से , मौसम के बदलने, किसी नई बीमारी के होने, परिवार में  या किसी व्यक्ति को कठिनाई का सामना करना पड़ता है। अब आपके मन एक सवाल उठ रहा होगा कि आखिरकार 
रोग-प्रतिरोधक क्षमता जरूरी क्यो है और इसे कैसे बढ़ाया जा सकता हैं। 

इस article को पढ़कर इम्युनिटी  से जुड़े सभी सवालों के जवाब मिल जाएगें।  

Contents:-
1) रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्या है?
           ( What is immunity ?)
2) रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्यों जरूरी है?  
          ( Why immunity is important?)
3) रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने के लक्षण क्या        हैं?  ( Symptoms of Low immunity?)
4) रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाएं ?
          ( How to increase immunity?) 
5) रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे चेक करे ?
          ( How to check immunity? )
6) Immunity  से सम्बंधित सबसे अधिक पूछे जाने   वाले सवाल ।
          ( FAQ’S related to immunity. )


   रोग प्रतिरोधक क्षमता क्या है? (What is     immunity power?in Hindi) 

  रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर को संक्रमण, कीटाणुओं और जीवाणुओं से दूर रखने में मदद करती है। साफ शब्दों में कहा जाए तो रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर को एक ऐसा सुरक्षा कवच प्रदान करती है, जिससे शरीर जल्दी किसी साधारण बीमारी की चपेट में नहीं आता।
इस प्रकार, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बीमारियों से लड़ने की शक्ति है, जो व्यक्ति को सेहतमंद रहने में सहायता करती है।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता क्यों जरूरी है?                  
( Why immunity is important? In hindi ?)

◆ सेहतमंद रहना- रोग-प्रतिरोधक क्षमता के सही होने का प्रमुख कारण सेहतमंद रहना है।
जिस व्यक्ति की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, वह अधिक सेहतमंद रहता है।

◆मानसिक रूप से मजबूत होना- रोग-प्रतिरोधक क्षमता का असर लोगों के शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क पर भी पड़ता है।
यह उससे मानसिक रूप से मजबूत रहने में मदद करती है, जिससे उसे मानसिक रोग होने की संभावना कम हो जाती है।

◆शारीरिक मज़बूती के लिए - रोग-प्रतिरोधक क्षमता व्यक्ति को शारीरिक रूप से मजबूत रहने में सहायता रहती है।
एक ओर, कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को कमज़ोर महसूस होती है,वहीं दूसरी ओर मजबूत रोग-प्रतिरोधक क्षमता वाले व्यक्ति को ऐसी कोई समस्या नहीं होती है,बल्कि उसकी शारीरिक मज़बूती बनी रहती है।

◆आने वाली पीढ़ियों को सेहमंद रखना- अक्सर, कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता की समस्या पीढ़ी दर तक चलती रहती है, जिसकी वजह से यह समस्या आने वाली पीढ़ियों में भी देखने को मिल सकती है।
इसी कारण, इसे मजबूत बनाने की आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ी सेहतमंद रहे।

◆परिवार को गंभीर बीमारियों से बचाना- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का असर आने वाली पीढ़ियों पर नहीं बल्कि परिवार के मौजूद सदस्यों की सेहत पर भी पड़ता है।
इस प्रकार, सभी लोगों को अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए ताकि उनके परिवार के सदस्यों को किसी तरह की बीमारी न हो।


रोग-प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर होने के लक्षण क्या हैं? (Symptoms of Low immunity power in Hindi)

◆तनाव महसूस होना :- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का प्रमुख लक्षण तनाव महसूस होना क्योंकि इसका असर व्यक्ति के शरीर के साथ-साथ उसके मानसिक सेहत पर भी पड़ता है।
इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति को अचानक से किसी भी काम में मन न लगाना, लोगों से  न मिलना इत्यादि जैसे लक्षण महसूस होते हैं तो उसे तुरंत मनोवैज्ञानिक से मिलकर अपनी सेहत की जांच करानी चाहिए ताकि तनाव का इलाज समय रहते कराया जा सके।

◆अधिक सर्दी लगना:- यदि किसी शख्स को अधिक सर्दी महसूस हो तो उसे इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि यह लॉ इम्युनिटी पावर का लक्षण हो सकता है।

◆पेट संबंधी परेशानियां होना:- अगर किसी शख्स को पेट संबंधी परेशानियाँ जैसे दस्त लगना, कब्ज होना, गैस होना इत्यादि होती हैं, तो उसे मेडिकल सहायता लेनी पड़ सकती है क्योंकि यह कमज़ोर रोग- प्रतिरोधक क्षमता का लक्षण हो सकता है।

◆चोट को ठीक होने में समय लगना:- सभी लोगों को चोट को लगती ही रहती है, जो कुछ समय के बाद स्वयं ही ठीक हो जाती है।
लेकिन, यदि किसी शख्स की चोट लंबे समय तक ठीक न हो तो उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को देनी चाहिए क्योंकि ऐसा कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का संकेत हो सकता है।

◆संक्रमण होना:- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का अन्य लक्षण संक्रमण होना है।
ऐसी स्थिति में संक्रमित लोगों को डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए ताकि उन्हें संक्रमण से छुटकारा मिल सके।

◆कमज़ोरी महसूस होना:- लॉ इम्युनिटी पावर का अन्य लक्षण कमज़ोरी महसूस होना है।
हालांकि,लोग कमज़ोरी महसूस को सामान्य समस्या समझते हैं, लेकिन उनका ऐसा सोचना उन्हें बीमारी बना सकता है।

रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाएं ( How to increase immunity? In hindi)

◆जल:- यह प्राकृतिक औषधि है। प्रचुर मात्रा में शुद्ध जल के सेवन से शरीर में जमा कई तरह के विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। पानी या तो सामान्य तापमान पर हो या फिर थोड़ा कुनकुना। फ्रिज के पानी के सेवन से बचें।
◆रसदार फल :- संतरा, मौसमी आदि रसदार फलों में भरपूर मात्रा में खनिज लवण तथा विटामिन सी होता है। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में ये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आप चाहें तो पूरे फल खाएँ और चाहें तो इनका रस निकालकर सेवन करें। हां, रस में शकर या नमक न मिलाएं।
◆अंकुरित अनाज :- अंकुरित अनाज (जैसे मूंग, मोठ, चना आदि) तथा भीगी हुई दालों का भरपूर मात्रा में सेवन करें। अनाज को अंकुरित करने से उनमें उपस्थित पोषक तत्वों की क्षमता बढ़ जाती है। ये पचाने में आसान, पौष्टिक और स्वादिष्ट होते हैं।
 ◆सलाद:- भोजन के साथ सलाद का उपयोग अधिक से अधिक करें। भोजन का पाचन पूर्ण रूप से हो, इसके लिए सलाद का सेवन जरूरी होता है। ककड़ी, टमाटर, मूली, गाजर, पत्तागोभी, प्याज, चुकंदर आदि को सलाद में शामिल करें। इनमें प्राकृतिक रूप से मौजूद नमक हमारे लिए पर्याप्त होता है। ऊपर से नमक न डालें।
◆तुलसी:- तुलसी का धार्मिक महत्व अपनी जगह है मगर इसके साथ ही यह एंटीबायोटिक, दर्द निवारक और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी फायदेमंद है। रोज सुबह तुलसी के 3-5 पत्तों का सेवन करें।
 ◆योग :- योग व प्राणायाम शरीर को स्वस्थ और रोगमुक्त रखने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी जानकार से इन्हें सीखकर प्रतिदिन घर पर इनका अभ्यास किया जाना चाहिए।
◆हंसना:- हंसने से रक्त संचार सुचारु होता है व हमारा शरीर अधिक मात्रा में ऑक्सीजन ग्रहण करता है। तनावमुक्त होकर हँसने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने में मदद मिलती
◆हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाएं ...

◆​ध्रूमपान न करें ...

​◆रोजाना करें व्यायाम ...

◆​गहरी नींद लें ...

◆​फल और सब्जियों का करें सेवन ...

◆​स्ट्रेस न लें ...

रोग प्रतिरोधक क्षमता को कैसे चेक करे ( How to check immunity )

◆अगर आपको लगता है कि आप दूसरों की अपेक्षा बार-बार बीमार होते हैं, जुकाम की शिकायत रहती है, खांसी, गला खराब होना या स्किन रैशेज जैसी समस्या रहती है तो बहुत पॉसिबल है कि यह आपके इम्यून सिस्टम की वजह से हो। कैंडिडा टेस्ट का पॉजिटिव होना, बार-बार यूटीआई, डायरिया, मसूड़ों में सूजन, मुंह में छाले वगैरह भी खराब इम्यूनिटी के लक्षण हैं।

◆कुछ लोग जरा सा मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं। यह शरीर का तापमान कम होने से हो सकता है। मजबूत इम्यून सिस्टम के लिए नॉर्मल ऑरल बॉडी टेंपरेचर 36.3 डिग्री से. से नीचे नहीं होना चाहिए। क्योंकि सर्दी के वायरस 33 डिग्री पर सर्वाइव करते हैं। रोजाना एक्सर्साइज करने से आप अपनी बॉडी का तापमान और इम्यूनिटी बढ़ा सकते हैं। साथ ही गर्माहट पैदा करने वाले मसाले जैसे लहसुन अदरक, दालचीनी लौंग वगैरह भी बेहद काम के हैं।

◆विटमिन डी की कमी :-विटमिन डी इम्यूनिटी को   बढ़ाता है और ज्यादातर लोगों में इसकी कमी होती है। अगर आपकी ब्लड रिपोर्ट में विटमिन डी की कमी है तो आपको इसका लेवेल सही करने की हर कोशिश करनी चाहिए। इसके अलावा लगातार थकान, आलस या ऐसे घाव जो लंबे वक्त तक न भरें, नींद न आना, डिप्रेशन और डार्क सर्कल भी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता की निशानी है।

Immunity से सम्बंधित सबसे अधिक पूछे जाने वाले सवाल (FAQ’S related to immunity )

 Q1. प्रतिरोधक-क्षमता क्या  है ?

Ans.रोग प्रतिरोधक क्षमता शरीर को संक्रमण, कीटाणुओं और जीवाणुओं से दूर रखने में मदद करती है। 

Q.2 कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कैसे बढ़ाया जा सकता है?

Ans- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मुख्य रूप से खान-पान में बदलाव करके, एक्सराइज़ करके, साफ-सफाई का ध्यान रखकर इत्यादि तरीके से बढ़ा सकते हैं।

Q3. लॉ इम्युनिटी पावर के लक्षण क्या हैं?

Ans- यदि किसी व्यक्ति को स्वास्थ संबंधी कोई समस्या,अंदरुनी अंगों में सूजन होना, जेनेटिक कारण इत्यादि लक्षण नज़र आए तो उसे अपनी सेहत की जांच करानी चाहिए क्योंकि ये लॉ इम्युनिटी पावर के संकेत हो सकते हैं।

Q4. रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए क्या खाना चाहिए?

Ans- रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में खट्टे फल, ब्रोकली, अदरक, लहसून इत्यादि का सेवन करना लाभकारी साबित हो सकता है।

Q5. रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए कौन-से घरेलू नुस्खे अपनाए जा सकते हैं?

Ans- रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में घरेलू नुस्खे भी सहायक साबित हो सकते हैं।
इसमें नींबू पानी पीना, शहद का सेवन करना, एक्सराइज़ करना, धूप में कुछ समय बिताना इत्यादि करना लाभकारी साबित होता है।

Q6. कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता के कारण क्या हैं?

Ans- कमज़ोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता मुख्य रूप से नशीले पदार्थों का सेवन करना, अनहेल्थी फूड करना, किसी बीमारी से पीड़ित होना, सफेद सेल्स का कमज़ोर होना इत्यादि कारणों से हो सकती है।

Q7. किसी व्यक्ति के बीमार होने के कारण क्या हैं?

Ans- यदि कोई व्यक्ति पर्याप्त नींद न ले, एक्सराइज़ न करे, पौष्टिक भोजन न करे, तो उसके बीमार होने की संभावना काफी अधिक रहती है।

Q8. रोग-प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित कैसे बनाया जा सकता है?

Ans- रोग- प्रतिरोधक क्षमता को संतुलित बनाया जा सकता है।
इसके लिए अधिक मात्रा में सब्जियों और फलों का सेवन करना, हाथों को अच्छी तरह से धोना, धूम्रपान न करना, शराब का सेवन न करना इत्यादि को किया जा सकता है।

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